डेटा सुरक्षा
आपकी जानकारी को हम कैसे सुरक्षित रखते हैं, सीधे शब्दों में।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-05. हिंदी पाठ मान्य है।
आपकी जानकारी कौन देख सकता है
सिर्फ़ युवा दल के गिने-चुने लोग, और वह भी हर एक अपने नाम वाले एडमिन खाते से। साझा लॉगिन नहीं चलते। कौन, कब, क्या देखता या बदलता है, इसका रिकॉर्ड अपने आप बनता है और एक साल रखा जाता है। इन खातों के अलावा कोई भी, चाहे कार्यकर्ता हो या बाहर का व्यक्ति, अलग-अलग जवाब नहीं देख सकता।
जानकारी कहाँ रहती है
एक ही सर्वर पर, जो हमारे नियंत्रण में है और मुंबई, भारत में रखा है। बैकअप भी वहीं रहते हैं। मोबाइल नंबर एन्क्रिप्ट करके, यानी कोड में बदलकर, रखे जाते हैं, ताकि कोई डेटाबेस तक पहुँच भी जाए तो नंबर सीधे न पढ़ सके। साइट और आपके फ़ोन के बीच सारा आदान-प्रदान https से सुरक्षित रहता है।
कब तक
नाम या नंबर वाले जवाब चुनाव नतीजे की घोषणा के 90 दिन के भीतर, यानी 13 दिसंबर 2026 तक, मिटा दिए जाते हैं या पहचान हटाकर रखे जाते हैं। उसके बाद सिर्फ़ जोड़े हुए आँकड़े बचते हैं। आप चाहें तो अपना जवाब इससे पहले भी मिटवा सकते हैं।
हम क्या दिखाते हैं
सिर्फ़ जोड़े हुए आँकड़े, जैसे 'कितने लोगों ने पानी को पहली प्राथमिकता कहा'। किसी एक व्यक्ति का जवाब, नाम, मोहल्ला या संदेश कभी नहीं दिखाया जाता, न साइट पर, न कहीं और।
अगर कुछ गलत हो जाए
अगर आपकी जानकारी कभी लीक हो जाए, खो जाए या गलत हाथों में पड़ जाए, तो हम बिना देर किए हर प्रभावित व्यक्ति को सीधी भाषा में बताएँगे: क्या हुआ, आपके लिए इसका क्या मतलब है, हमने क्या किया, आपको क्या करना चाहिए, और किससे संपर्क करना है। साथ ही डेटा संरक्षण बोर्ड को बिना देर किए सूचना देंगे और 72 घंटे के भीतर पूरी रिपोर्ट भेजेंगे।
अपनी जानकारी देखें, सुधारें या मिटाएँ
ये कदम उठाएँ:
- [ ] पर लिखें या [ ] पर फ़ोन करें
- बताएँ कि आप क्या चाहते हैं: देखना, सुधारना या मिटाना
- जवाब भरते समय जो नाम या फ़ोन नंबर दिया था, वह बताएँ, और हो सके तो तारीख भी, ताकि हम आपका जवाब ढूँढ सकें
- हम 7 दिन के भीतर जवाब देते हैं
अगर आपने नाम या नंबर नहीं दिया था
ऐसे में आपका जवाब आपसे जुड़ा ही नहीं है। ऐसे जवाब को हम अलग से पहचान नहीं सकते, इसलिए उसे अकेले मिटा भी नहीं सकते। पर उसमें आपकी पहचान भी नहीं है।
कानूनी आधार
हम आपकी जानकारी सिर्फ़ आपकी सहमति के आधार पर लेते हैं, जैसा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 कहता है। कोई और आधार नहीं है। सहमति वापस लेते ही जानकारी मिटा दी जाती है। इस कानून के कई हिस्से अभी लागू होने बाकी हैं, फिर भी हम अभी से इसके हिसाब से चलते हैं।